“समकालीन सामाजिक संदर्भ में प्रेमचंद की कहानियाँ: एक पुनर्व्याख्या” (2023) Shodh Utkarsh, 1(3), पृ. 95–98. पर उपलब्ध: https://www.shodhutkarsh.com/index.php/s/article/view/64 (अंतिम उपयोग: 4 नवम्बर 2026).